Ghazipur News : शब्द साधना का उत्सव: कर्मवीर सत्यदेव सिंह की 97वीं जयंती पर गाधिपुरम में अद्भुत काव्य-यात्रा



शब्दों के तपस्वी, कर्म के पुजारी एवं 'सत्यदेव ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेज' के संस्थापक पूज्य कर्मवीर सत्यदेव सिंह जी की सत्तानवीं जन्म जयंती गाधिपुरम,बोरसिया के पावन परिसर में एक अद्भुत काव्य-उत्सव के रूप में मनाई गई। यह केवल एक जयंती नहीं थी, अपितु शब्दों की साधना, कर्म की आराधना एवं भारतीय साहित्यिक चेतना का एक जीवंत महाकुंभ था।


प्रातःकाल ग्रुप के सभी संस्थानों में कर्मवीर जी के स्नेहिल एवं देदीप्यमान चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। किंतु मुख्य आकर्षण सत्यदेव कॉलेज में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन रहा, जहाँ देश के कोने-कोने से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।

          विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ वीणापाणि के प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह उपस्थित रहे, तो अध्यक्षता की गौरवपूर्ण भूमिका मिशिगन, अमेरिका स्थित गीता फाउंडेशन के संस्थापक श्री योगी आनंद जी महाराज ने निभाई। सत्यदेव ग्रुप की संरक्षिका श्रीमती सावित्री देवी, मुख्य प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद सिंह, प्रबंध निदेशक डॉ. सानंद सिंह, प्रबंधक श्रीमती सुमन सिंह, प्रबंधक डॉ. प्रीति सिंह, काउंसलर दिग्विजय उपाध्याय एवं  डायरेक्टर श्री अमित रघुवंशी जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।


        सत्यदेव स्कूल, गाजीपुर के बाल-कलाकारों ने स्वागत गीत, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के मधुर संगम से मन मोह लिया, वहीं बीसीए के विद्यार्थियों ने नारी सशक्तिकरण पर आधारित नृत्य की मनोहारी   प्रस्तुति से समा बाँध दिया।

        

कवि सम्मेलन में जब शब्दों ने अंगड़ाई ली तो पूरा सभागार झूम उठा।

मंच का सफल संचालन वरिष्ठ कवि राजेंद्र त्रिपाठी 'लालू तिवारी' ने किया। मुख्य प्रबंध निदेशक प्रो. आनंद सिंह एवं प्रबंध निदेशक प्रो. सानंद सिंह ने सभी आमंत्रित कवियों का अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं माल्यार्पण से सत्कार किया।

     काव्य साधकों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं की रूह हिला दी।

बादशाह प्रेमी – भोजपुरी के ठेठ अंदाज में हास्य-व्यंग्य के साथ-साथ माँ पर एक ऐसी मार्मिक कविता सुनाई कि आँखें नम हो गईं।

डॉ. वंदना शुक्ला – उनकी मुखर अभिव्यक्ति ने सुख और जीवन दर्शन का मंत्र दे दिया:

    “सुख देती है, हँसती है, हँसाती है ज़िंदगी,

    जीने का हर सलीक़ा सिखाती है ज़िंदगी।”

कवि भूषण त्यागी – की गूँजती पंक्तियों ने सत्ता और काल के रहस्यों को उद्घाटित किया-

    “मैं ही उत्तर, मैं ही सवाल, मैं ही काल का महाकाल”

    और राम वंदना “हे राम तुम्हारी जय हो” से श्रोताओं को अलौकिक आनंद में डुबो दिया।

 अमरनाथ तिवारी 'अमर' – देशप्रेम की अमर चेतना को शब्दों में पिरोते हुए कहा-

    “जाऊँ विदेश तो किस देश? बहुत दिमाग दौड़ाया,

    फिर अपना ही देश भाया।”

मनोज द्विवेदी 'मधुर' – उनकी विनम्र स्वीकारोक्ति ने खूब तालियाँ बटोरीं-

    “मैं ज़माने की नज़रों में नाकाम हूँ,

    क्योंकि मैं किसी को छला ही नहीं।”

मशहूर चिकित्सक डॉ. एम.डी. सिंह – की कविता ने कर्मवीर सत्यदेव सिंह जी के व्यक्तित्व, तपस्या एवं उपलब्धियों का जीवंत चित्रण किया।

     कार्यक्रम के समापन के अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि- "कर्मवीर सत्यदेव सिंह केवल एक शिक्षा सत्र निर्माता ही नहीं, अपितु साहित्य-प्रेमी, मानवीय मूल्यों के पुंज और अद्वितीय वक्ता थे।"

 अध्यक्षीय आसन से योगी आनंद जी महाराज ने कहा कि-"सत्यदेव ग्रुप परिवार पर उनकी कृपा सदा बनी रहे, क्योंकि यहाँ साहित्य और संस्कार का अद्भुत समन्वय है।"


कार्यक्रम के अन्त में गाजीपुर के गौरव,वरिष्ठ कवि एवं कुशल मंच संचालक श्री हरि नारायण 'हरीश' जी के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

       इस अवसर पर पूर्व भाजपा अध्यक्ष सुनील सिंह, कृष्ण बिहारी राय, हिंदू युवा वाहिनी अध्यक्ष अमित सिंह, बीएसए उपासना रानी वर्मा, हॉटमैन इंटर कॉलेज के प्रबंधक फादर पी. विक्टर, डॉ. अरविंद सिंह, छविनाथ मिश्रा, विनोद उपाध्याय, कृपा शंकर राय, विनय राय 'बबुरंग', डॉ. सुनील सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद् एवं साहित्यानुरागी जनसैलाब उपस्थित था।

सत्यदेव ग्रुप परिवार ने सभी साहित्यकारों, अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस काव्य-यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया।

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