इस नूतन वर्ष के प्रथम दिवस का आरंभ गुरुवार, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र,शुक्ल योग के साथ हो रहा है। आचार्य पंडित अभिषेक तिवारी ने बताया की चैत्र नवरात्रि 2026 में देवी भगवती पालकी पर सवार होकर पृथ्वीलोक में विचरण करेंगी तथा हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी।
नवरात्रि पर अनेक शुभ योग बन रहे हैं ,शुक्र और चंद्रमा की युति से कलात्मक योग, सर्वार्थ सिद्धि योग,अमृत सिद्धि योग तथा ब्रह्म योग, शुक्ल योग, शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में सूर्य, शनि, चंद्रमा के साथ विराजमान होकर चतुर्थ ग्रही योग तथा मालव्य योग का निर्माण कर रहे हैं, जो की सभी क्षेत्र के जातकों के लिए शुभ फलदाई रहने वाला है।
वर्ष 2026 में तीन(3) बड़े ग्रह राशि परिवर्तन कर रहे हैं। 2026 में देव गुरु बृहस्पति अतिचारी चाल (तेज गति) वर्ष में दो बार राशि परिवर्तन करेंगे–2 जून 2026 को मिथुन राशि से अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे तथा 31 अक्टूबर 2026 को कर्क राशि से सिंह राशि में गुरु का गोचर होगा। 5 दिसंबर 2026 को राहु तथा केतु राशि परिवर्तन करेंगे राहु कुंभ राशि से मकर राशि में तथा केतु सिंह राशि से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। शनि महाराज का गोचर मीन राशि में ही रहेगा। मेष,कुंभ तथा मीन राशि में शनि की साडेसाती का प्रभाव तथा सिंह व धनु राशि के जातक शनि की ढैया से प्रभावित रहेंगे।
हिंदू नव संवत्सर के साथ ही नवरात्रि प्रारंभ होती हैं।
संवत्सर 2083 का नाम रौद्र होगा, जिसमें देव गुरु बृहस्पति राजा एवं भूमि पुत्र मंगल देव मंत्री पद का कार्यभार संभालेंगे।
रौद्र नाम संवत्सर फल–
रौद्रेब्दे नृपसंभूतक्षोभक्लेशसमन्विते।
सततंत्वखिलालोकामध्यसस्यार्घवृष्टयः॥
रौद्र नाम संवत्सर होने से राजाओं (शासकों/सत्ताओं) के मध्य आपसी टकराव, क्षोभ (असंतोष) और क्लेश की स्थिति उत्पन्न होगी। संपूर्ण विश्व में अनाज (सस्य), वस्तुओं के दाम (अर्घ) और वर्षा की स्थिति 'मध्यम' (औसत) रहती है। राजनीतिक अस्थिरता, मंदी, वर्षा मध्यम रहेगी। सामाजिक उथल पुथल देखने को मिलेगी।
राजा देव गुरु बृहस्पति–
बृहस्पति (गुरु) वर्ष के अधिपति (राजा) हों, तो वह समय अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। अच्छी वर्षा होती है, गायें 'कामधेनु' के समान प्रचुर मात्रा में दूध देने लगती हैं। ब्राह्मण/विद्वान बुद्धिजीवी निरंतर यज्ञ, अनुष्ठान और अग्निहोत्र (हवन) धर्मादि कार्यों में लीन रहते हैं। सृष्टि के सभी जनों के मध्य हर्षोल्लास का वातावरण रहता है तथा चारों ओर खुशहाली/ उत्सव मनाए जाते हैं।
मंत्री मंगलदेव–
अवनिजो ननु मंत्रिकतां गतो भवति दस्युगदादिजवेदना।जनपदेषु जयंसुखसंचयंनबहुगोषुपयो द्विजकर्म च॥
यदि वर्ष के मंत्री भूमिपुत्र मंगल हो तो दस्यु (चोर-अपराधी), गदा (रोगों) और शस्त्रों के कारण (वैश्विक स्तर पर अनेक देशों के मध्य युद्ध की स्थिति) पीड़ा होने की संभावना रहती है। आम जनमानस भौतिक सुख सुविधाओं का भोग करें।
संक्षेप में मंगल मंत्री होने से साहसी, विजयी और आधिकारिक पद प्राप्त होते हैं, साथ ही शत्रुओं से भय और आध्यात्मिक कार्यों के प्रति उदासीनता भी दर्शाता है। अग्नि जनित घटनाएं अधिक होगी रक्त संबंधी विकार (रोग) होने की संभावना भी अधिक रहेगी।
अन्य ग्रहों का पदभार
1–सस्येश,नीरसेश तथा धनेश के स्वामी भी देव गुरु बृहस्पति ही होंगे।
2–मेघेष, दुर्गेश तथा फलेस का पद भार चंद्र देव को प्राप्त होगा।
3– शनि महाराज को रसेश का कार्यभार प्राप्त होगा।
4–धान्येश का पदभार बुध देव को प्राप्त होगा।
वर्ष में चार ग्रहण
वर्ष में चार ग्रहण पड़ेंगे जिसमें दो सूर्य ग्रहण एवं दो चंद्रग्रहण होंगे।
वर्ष का प्रथम चंद्र ग्रहण दिनांक 12 अगस्त 2026 को खग्रास पूर्ण सूर्य ग्रहण रहेगा। जोकि भारत में दृश्य नहीं होगा, इसका सूतक भी नहीं लगेगा।
दिनांक 28 अगस्त से 2026 को खंडग्रास चन्द्र ग्रहण रहेगा, जो कि भारत भूमि पर नहीं दिखाई देगा, इसका कोई धार्मिक महत्व भी नहीं होगा।
दिनांक 6 फरवरी 2027 को कंकणाकृति सूर्य ग्रहण रहेगा, जो कि भारत में दृश्य नहीं होगा और इसका धार्मिक महत्व भी नहीं रहेगा।
दिनांक 20 फरवरी 2027 उपच्छाया चंद्र ग्रहण संवत् 2083 का अंतिम ग्रहण रहेगा जो भी भारत में दृश्य नहीं होगा इसका भी कोई धार्मिक महत्व नहीं रहेगा।
अतः संवत 2083 भारत भूमि ग्रहण मुक्त रहेगी।
